रायबरेली। जिले के डीह विकास क्षेत्र के विभिन्न प्राथमिक विद्यालयों में बुधवार को बालवाटिका “नवारम्भ उत्सव” बड़े ही उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बेसिक शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार आयोजित इस उत्सव का उद्देश्य 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को पूर्व-प्राथमिक शिक्षा से जोड़ना रहा। कार्यक्रम ने नन्हे बच्चों के विद्यालय जीवन की शुरुआत को यादगार बनाने के साथ-साथ नामांकन बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि शिक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के आपसी समन्वय से यह अभियान सफल हुआ। उन्होंने बच्चों की पहचान, अभिभावकों से संपर्क और बालवाटिकाओं की साज-सज्जा में अहम योगदान दिया, जिससे नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद प्रधानाध्यापकों ने पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। नन्हे बच्चों ने गीत, नृत्य और कविताओं की प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। विशेष आकर्षण रहा 3–4 वर्ष के बच्चों द्वारा रेत-बालू पर लेखन, जिसे “नन्ही उंगलियों की पहली छाप” के रूप में सराहा गया।
आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के सहयोग से तैयार “क्रियाशील बालवाटिका” में पढ़ना, कला, अभिनय और ब्लॉक जैसे चार लर्निंग कॉर्नर बनाए गए थे। इसके साथ ही प्रिंट-रिच सामग्री, वंडरबॉक्स और टीएलएम भी आकर्षण का केंद्र रहे। अभिभावकों ने कक्षाओं का भ्रमण कर बच्चों के पोर्टफोलियो देखे और बाल्यावस्था शिक्षा के महत्व को समझा। यह आयोजन विकासखंड स्तर पर पूर्व-प्राथमिक शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।





