हाथरस। प्रतिकूल मौसम ने इस बार गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। एक सप्ताह पहले आई बारिश और आंधी से तैयार फसल खेतों में गिर गई, जिससे दाने की गुणवत्ता प्रभावित हो गई और दाना सिकुड़ गया। नमी अधिक होने के कारण सरकारी खरीद केंद्रों पर अभी खरीद शुरू नहीं हो सकी है, जबकि खुले बाजार में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से करीब 300 रुपये कम दाम मिल रहा है। फिर मौसम बिगड़ने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
गेहूं की कटाई शुरू हो चुकी है और मंडी में करीब 500 क्विंटल गेहूं पहुंचा, लेकिन खरीद केंद्रों पर शुरुआत नहीं हो पाई। सोमवार को तैयारी में समय लगा और मंगलवार को अवकाश के कारण खरीद नहीं हो सकी। जिले में इस बार 58 क्रय केंद्र बनाए गए हैं, जो पिछले वर्ष 64 थे। मंडी समिति हाथरस में पांच, सादाबाद में चार और सिकंदराराऊ में छह केंद्र स्थापित किए गए हैं, जबकि अन्य केंद्र पीसीएफ समितियों पर संचालित होंगे।
अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में मंडी में आ रहा गेहूं मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है। निर्धारित मानकों के तहत गेहूं में नमी 12 से 14 प्रतिशत के बीच होनी चाहिए, जबकि मंडी में 18 से 20 प्रतिशत तक नमी पाई जा रही है। इसी कारण बाजार में गेहूं का भाव 2200 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है, जबकि इस बार सरकार ने 2585 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी तय किया है। आढ़ती प्रवीन वार्ष्णेय के अनुसार, व्यापारी नमी मापने के लिए उपकरणों से जांच कर रहे हैं, लेकिन अधिक नमी के चलते किसानों को कम कीमत पर ही फसल बेचनी पड़ रही है।





