हाथरस। सूचना का अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजीव वार्ष्णेय ने जनपद के कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे प्रदेश सरकार की पारदर्शी शासन व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता वाले जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) और सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम को जिले के कुछ अधिकारियों ने निष्प्रभावी बना दिया है। जारी प्रेस विज्ञप्ति में राजीव वार्ष्णेय ने आरोप लगाया कि जब भी किसी जनसमस्या या भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायत पोर्टल पर दर्ज की जाती है, तो संबंधित अधिकारी मौके पर जांच करने के बजाय कार्यालय में बैठकर ही झूठी और भ्रामक रिपोर्ट लगा देते हैं। वहीं आरटीआई के तहत मांगी गई सूचनाओं को या तो दबा दिया जाता है या अधूरी जानकारी देकर आवेदकों को मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों की इस कार्यप्रणाली से न केवल शासन की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिल रहा है। संगठन ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन भेजकर मांग की है कि पोर्टल पर गलत रिपोर्ट लगाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सेवा नियमावली के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए और उनकी संपत्ति की जांच कराई जाए।
जिलाध्यक्ष ने बताया कि संगठन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मिलने का समय भी मांगा है, ताकि साक्ष्यों के साथ अधिकारियों की कार्यप्रणाली को उजागर किया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो संगठन लखनऊ और दिल्ली में बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होगा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह लड़ाई निर्णायक मोड़ पर है और जनता के अधिकारों से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।





