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निजीकरण के विरोध में रजिस्ट्री कार्यालय पर सातवें दिन भी धरना जारी

हाथरस। निबंधन (रजिस्ट्री) कार्यालयों के निजीकरण के प्रस्ताव के विरोध में अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं और टाइपिस्टों का आंदोलन मंगलवार को सातवें दिन भी जारी रहा। उप-पंजीयक कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन और कलमबंद हड़ताल कर प्रदर्शनकारियों ने सरकार से निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेने की मांग की। धरने की अध्यक्षता डी.के. चौहान ‘शोला’ ने की, जबकि संचालन समाजप्रिय रत्न एडवोकेट ने किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि रजिस्ट्री कार्यालयों के निजीकरण से हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। साथ ही आम जनता को भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ सकता है।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने निजीकरण का प्रस्ताव वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल रोजगार बचाने का नहीं, बल्कि आम जनता के हितों की रक्षा का भी है। धरने को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिला उपाध्यक्ष अनार सिंह यादव तथा बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के प्रत्याशी एवं पूर्व महासचिव विनोद कुमार रावत ने भी समर्थन दिया। दोनों वक्ताओं ने आंदोलनकारियों की मांगों को जायज बताते हुए सरकार से प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की अपील की। बैठक में निर्णय लिया गया कि निजीकरण का प्रस्ताव वापस होने तक 18 जून तक आंदोलन और कलमबंद हड़ताल जारी रहेगी। धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अधिवक्ता, कातिब, स्टाम्प विक्रेता एवं टाइपिस्ट उपस्थित रहे।

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