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दो दिवसीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला का शुभारंभ, प्रभारी मंत्री संजीव गोंड ने बताया खेती का भविष्य

चंदौली। केंद्र सरकार के सेवा, सुशासन एवं गरीब कल्याण के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में कृषि विज्ञान केंद्र, चंदौली में दो दिवसीय (18 एवं 19 जून 2026) प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं जन-जागरूकता अभियान का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का आयोजन आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं जनपद के प्रभारी मंत्री संजीव कुमार गोंड ने की। इस अवसर पर विधायक मुगलसराय रमेश जायसवाल, विधायक चकिया कैलाश आचार्य, सैयदराजा विधायक प्रतिनिधि सुशील सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह, जिलाधिकारी चन्द्र मोहन गर्ग, मुख्य विकास अधिकारी आर. जगत साई, उपनिदेशक कृषि भीमसेन, जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव तथा जिला उद्यान अधिकारी शैलेन्द्र दुबे सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और लगभग 400 से 500 किसान उपस्थित रहे। प्रभारी मंत्री संजीव कुमार गोंड ने अपने संबोधन में कहा कि प्राकृतिक खेती भविष्य का आधार है। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करके खेती की लागत घटाई जा सकती है तथा देश को स्वस्थ और समृद्ध बनाया जा सकता है। उन्होंने किसानों की बड़ी भागीदारी को सरकार की नीतियों के प्रति जनता के विश्वास का प्रतीक बताया। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने भी किसानों को प्राकृतिक, पारंपरिक एवं जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उप कृषि निदेशक भीमसेन ने मुख्य अतिथियों का स्वागत करते हुए प्राकृतिक खेती की उपयोगिता और उसके लाभों पर विस्तृत जानकारी दी।

वैज्ञानिकों ने दिए सुपर एलनीनो से बचाव के उपाय

कृषि विज्ञान केंद्र, चंदौली के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने किसानों को बदलती जलवायु और सुपर एलनीनो जैसी परिस्थितियों से फसलों को सुरक्षित रखने के उपाय बताए। उन्होंने प्राकृतिक खेती के माध्यम से लागत कम करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया। कार्यशाला में किसानों को बीजामृत, जीवामृत और घनजीवामृत जैसे जैविक घोलों के निर्माण एवं उपयोग की जानकारी दी गई। साथ ही प्राकृतिक कीटनाशक ब्रह्मास्त्र, अग्नास्त्र और नीमास्त्र बनाने तथा उनके प्रयोग के बारे में भी विस्तार से बताया गया। वैज्ञानिकों ने कहा कि इन प्राकृतिक तकनीकों को अपनाकर किसान खेती की लागत को काफी हद तक कम कर सकते हैं और भूमि की उर्वरा शक्ति को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं। कार्यक्रम के पहले दिन किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाने, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने का संकल्प लिया। अंत में मुख्य विकास अधिकारी आर. जगत साई ने प्रभारी मंत्री, जनप्रतिनिधियों और उपस्थित किसानों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के प्रथम दिवस का समापन किया।

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