
चकिया, चंदौली। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर वामपंथी दलों के नेतृत्व में विभिन्न नारों के साथ जुलूस और सभा का आयोजन किया गया। “शिकागो के अमर शहीदों को लाल सलाम”, “1 मई मजदूर दिवस जिंदाबाद” और “मजदूरों के अधिकारों पर हमले बंद करो” जैसे नारों के बीच कार्यक्रम आयोजित हुआ। प्रशासन द्वारा जुलूस निकालने से रोकने और कुछ वामपंथी नेताओं की गिरफ्तारी के बावजूद कार्यकर्ताओं ने स्थानीय काली पोखरे से मार्च शुरू किया, जो गांधी पार्क पहुंचकर सभा में परिवर्तित हो गया।
सभा को संबोधित करते हुए वामपंथी नेताओं ने कहा कि यह पहला अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस है, जो 1 अप्रैल से लागू नए श्रम कानूनों के बाद आया है। उनके अनुसार ये नए लेबर कोड मजदूरों के अधिकारों को मजबूत करने के बजाय उन्हें कमजोर कर रहे हैं और कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब आठ घंटे का कार्यदिवस सार्वभौमिक अधिकार नहीं रह गया है और काम के घंटों में बढ़ोतरी के बावजूद उचित ओवरटाइम का प्रावधान नहीं है। वक्ताओं ने कहा कि ट्रेड यूनियन बनाना कठिन हो गया है और सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति को कमजोर किया जा रहा है। साथ ही, मालिकों को कर्मचारियों को मनमाने ढंग से नौकरी से निकालने के अधिक अधिकार मिल गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और आर्थिक संकट के कारण कई उद्योग प्रभावित हुए हैं, जिससे प्रवासी मजदूरों को वापस अपने गृह राज्यों में लौटना पड़ रहा है। देश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में ठेका मजदूर वेतन वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। वामपंथी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार मजदूर आंदोलनों को दबाने का प्रयास कर रही है और आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की जा रही है।
सभा को खेग्रामस के राष्ट्रीय सह सचिव अनिल पासवान, एडवा नेत्री लालनमणि विश्वकर्मा, परमहंस राम, बदरुद्दीन, राजेंद्र यादव, बदरूद्वजा अंसारी, भृगुनाथ और जयनाथ राम सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम निवास पांडेय ने की, जबकि संचालन लालचंद एडवोकेट ने किया।





