• Home
  • रायबरेली
  • नौवीं मुहर्रम पर गूंजी ‘परचम-ए-अब्बास’ की सदाएं

नौवीं मुहर्रम पर गूंजी ‘परचम-ए-अब्बास’ की सदाएं

ऊंचाहार, रायबरेली। कस्बे में नौवीं मुहर्रम पर आयोजित मजलिसों में कर्बला के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मजलिसों में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानियों का जिक्र करते हुए कर्बला के घटनाक्रम को याद किया गया। श्रद्धालुओं ने मातम कर शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की। मजलिस को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने बताया कि नौवीं मुहर्रम कर्बला के इतिहास की वह अहम रात है, जब हजरत इमाम हुसैन ने अपने साथियों से कहा था कि जो जाना चाहे, वह जा सकता है, लेकिन कोई भी उनका साथ छोड़कर नहीं गया। इसी दिन हजरत अब्बास को अलम सौंपकर सेना का प्रमुख बनाया गया था।

मजलिस में हसनैन मुस्तफाबादी ने जैसे ही “परचमे हजरते अब्बास को लेकर अतहर, हम हुसैनी हैं, चला करते हैं अंगारों पर” पढ़ा, तो पूरा इमामबाड़ा “या हुसैन” के नारों से गूंज उठा। उन्होंने कर्बला की घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि 72 शहीदों की कुर्बानी के बाद भी यजीद की सेना का अत्याचार जारी रहा और खेमों में आग लगा दी गई। इसके बावजूद इमाम हुसैन के परिवार की महिलाओं, बच्चों और बीमार इमाम जैनुल आबदीन ने अद्भुत साहस का परिचय दिया। ओवैस नकवी ने अपने कलाम के माध्यम से इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए कहा कि कर्बला में उनकी कुर्बानी इंसानियत, सत्य और न्याय की मिसाल है। दिनभर चली मजलिसों में विभिन्न मौलाना ने तकरीरें कीं, जबकि असरफ हुसैन असद, शानू नकवी और अर्श नकवी सहित अन्य लोगों ने मातम किया।

शाम को बड़े इमामबाड़े में पारंपरिक आग का मातम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में हिंदू समुदाय के लोगों की भी उल्लेखनीय सहभागिता रही और कई युवाओं ने आग के मातम में हिस्सा लिया। इस दौरान पंकज अग्रहरि एवं ओम प्रकाश साहू द्वारा लंगर का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम में शाह आलम, माजू, मसरूर हैदर, कैसर अब्बास, हादी हुसैन, समीर नकवी, फ़राज़ नकवी, सैफ़ नकवी, शमशाद हुसैन, हुसैन मेहंदी, इंतिजार नकवी, अंसर नकवी, मंजर नकवी, पिंटू नकवी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। अंजुमन-ए-नकविया ने दूर-दराज से आए मेहमानों, पुलिस प्रशासन और टाउन एरिया ऊंचाहार का आभार व्यक्त किया।

मजलिस के समापन के बाद ताबूत एवं जुलजनाह का जुलूस निकाला गया। कस्बे के विभिन्न मार्गों से होकर निकले इस जुलूस में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मिलकर हिस्सा लिया। जुलूस इमाम चौक पहुंचा और देर रात तक मातमी कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top