हाथरस। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निबंधन विभाग के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं और टाइपिस्टों का संयुक्त आंदोलन शुक्रवार को 24वें दिन भी जारी रहा। उप-पंजीयक कार्यालय परिसर में आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने कहा कि जब तक सरकार निजीकरण का प्रस्ताव पूरी तरह वापस नहीं लेती, तब तक उनका लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा। धरने की अध्यक्षता दिनेश चौहान ‘शोला’ ने की, जबकि संचालन देवकांत कौशिक एडवोकेट ने किया। आंदोलन में शामिल अधिवक्ताओं ने सरकार से निजीकरण के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
दी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डी.के. चौहान ‘शोला’ एडवोकेट ने कहा कि यह आंदोलन केवल अधिवक्ताओं का नहीं, बल्कि आम जनता के अधिकारों, पारदर्शी व्यवस्था और रोजगार की सुरक्षा का भी संघर्ष है। उन्होंने सरकार से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल वापस लेने की मांग की। धरने में मौजूद अधिवक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि निबंधन कार्यालय को निजी हाथों में सौंपने के प्रस्ताव से अधिवक्ताओं और संबंधित वर्गों में भारी रोष है। उनका कहना था कि जब तक सरकार इस निर्णय को वापस नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक तथा उग्र रूप भी दिया जाएगा।
धरना-प्रदर्शन में सचिव राजेश बघेल, युवराज सिंह चौहान, गौरी शंकर गुप्ता, महेंद्र सिंह यादव, जय प्रकाश गुप्ता, मुरारी लाल शर्मा, हुकम सिंह बघेल, चंद्रभान बघेल, ब्रजेश यादव, महेश चंद्र अंजाना, जितेंद्र कुमार, सूरजपाल बघेल, रमेश शर्मा, के.एम. कुलश्रेष्ठ, ब्रजेश पाठक, महेंद्र सिंह, श्रीकृष्ण, मुनीश शर्मा, विजय उपाध्याय, प्रियांशु दरगढ़, दीपेश पाठक, कोमल सिंह, राधेश्याम बघेल, अजीत चौहान, आनंद कुमार, देवेंद्र कुमार संत, बाबूराम कातिब, संजीव कुमार यादव कातिब, धनीराम कातिब सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।





