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राष्ट्रीय पीएमआर दिवस पर पुनर्वास चिकित्सा के महत्व पर दिया गया जोर

रायबरेली। राष्ट्रीय भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास (पीएमआर) दिवस के अवसर पर पुनर्वास चिकित्सा के महत्व को रेखांकित करते हुए लोगों को जागरूक किया गया। इस वर्ष दिवस की थीम “Rehab is essential, not optional” (पुनर्वास आवश्यक है, विकल्प नहीं) रखी गई है, जिसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि पुनर्वास चिकित्सा उपचार प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है। इस अवसर पर बताया गया कि किसी भी बीमारी, दुर्घटना या विकलांगता के बाद उपचार की वास्तविक सफलता तभी मानी जाती है, जब मरीज दोबारा आत्मनिर्भर होकर सामान्य जीवन जीने में सक्षम हो सके। एम्स रायबरेली की कार्यकारी निदेशक डॉ. अमिता जैन के मार्गदर्शन में पीएमआर विभाग मरीजों को व्यापक पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार सड़क दुर्घटनाएं, स्ट्रोक (मस्तिष्काघात), रीढ़ की हड्डी की चोट, जोड़ों के रोग, अंग-विच्छेदन तथा अन्य गंभीर बीमारियों के बाद मरीजों के पुनर्वास में फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (पीएमआर) विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बहुविषयक टीम के सहयोग से मरीजों को उनकी अधिकतम कार्यक्षमता प्राप्त करने में मदद मिलती है। समय पर शुरू किया गया पुनर्वास उपचार न केवल विकलांगता की गंभीरता को कम करता है, बल्कि आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार लाता है।

राष्ट्रीय पीएमआर दिवस का उद्देश्य आमजन को पुनर्वास सेवाओं के प्रति जागरूक करना, विकलांगता की रोकथाम को बढ़ावा देना तथा प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण पुनर्वास सेवाएं पहुंचाने के लिए समाज और नीति-निर्माताओं को प्रेरित करना है। यह दिवस स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों के योगदान को सम्मानित करने का भी अवसर है। विशेषज्ञों ने कहा कि पुनर्वास चिकित्सा को स्वास्थ्य व्यवस्था का अभिन्न अंग बनाते हुए इसकी सेवाओं का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों तक किया जाना आवश्यक है। जनजागरूकता, समय पर उपचार और समन्वित पुनर्वास सेवाओं के माध्यम से लाखों लोगों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन प्रदान किया जा सकता है।

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