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“तिहारे माथे मुकुट विराज रहो, श्री गोवर्धन महाराज…”

भागवत कथा में गोवर्धन पर्वत का हुआ श्रंगार, लगा 56 भोग

फिरोजाबाद। नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को श्रद्धा और भक्ति का विशेष उत्सव देखने को मिला। कथा के दौरान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं एवं गोवर्धन पूजा का मनोहारी वर्णन किया गया। श्री गोवर्धन महाराज की झांकी के समक्ष 56 भोग अर्पित किए गए। “तिहारे माथे मुकुट विराज रहो, श्री गोवर्धन महाराज…” भजन पर भक्तगण झूम उठे और कथा स्थल भक्ति रस में डूब गया।
पॉलीवाल हॉल में मॉ नगर कोट सेवा समिति के तत्वावधान में चल रही कथा में आचार्य भोलेश्वर दयाल दीक्षित ने श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि पहले बृजवासी भगवान इंद्र की पूजा किया करते थे। बालयोगी श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि असली पूजनीय गोवर्धन पर्वत है, जो सबका पालन करता है। इससे क्रोधित होकर इंद्र ने भयंकर वर्षा और तूफान का प्रकोप गोकुलवासियों पर बरसाया, लेकिन श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी की रक्षा की। तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा प्रारंभ हुई।
कथा में गोवर्धन शिला का अभिषेक कर उसका अद्भुत श्रंगार किया गया और झांकी को मनमोहक रूप से सजाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान गोवर्धन के जयकारों से वातावरण गुंजायमान कर दिया।
कार्यक्रम में सदर विधायक मनीष असीजा का समिति की ओर से स्वागत एवं सम्मान किया गया। इस अवसर पर गिरधारी लाल मित्तल, राजकिशोर गर्ग, मनोज गुप्ता, मनोज कुमार अग्रवाल, अजय कुमार जैन, आशीष अग्रवाल, सौरभ अग्रवाल, रजत मित्तल, हरिओम वर्मा, प्रमोद राजौरिया, विनोद पचौरी, अनिल गोयल, मोहन बाबू अग्रवाल, आनंद तोमर, दिनेश गर्ग, सहज कुमार मित्तल, आशीष गर्ग, पवन मित्तल, विवेक तोमर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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