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बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में 31 अक्टूबर को ‘योग और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से कोरोनरी जोखिम कारकों के साक्ष्य-आधारित प्रतिवर्तन’ विषय पर द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के योग विभाग, खाद्य एवं पोषण विभाग, योग वेलनेस सेंटर और केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद (CCRYN), आयुष मंत्रालय, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में ‘8वें प्राकृतिक चिकित्सा दिवस’ के अवसर पर आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डीन ऑफ अकादमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के पूर्व कुलपति प्रो. अनिल शुक्ला उपस्थित रहे। मंच पर CCRYN निदेशक एवं एसजीपीजीआई के मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. राजेश हर्षवर्धन, इंडियन नेचुरोपैथी एंड योगा ग्रेजुएट्स मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. नवीन के.वी., गृह विज्ञान विद्यापीठ की संकायाध्यक्ष प्रो. यूवी किरण, खाद्य एवं पोषण विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. नीतू सिंह और योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेश्वर सिंह उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर एवं महात्मा गांधी के चित्र पर पुष्पांजलि से हुई। इसके पश्चात विश्वविद्यालय के कुलपति ने अतिथियों का स्वागत करते हुए उन्हें पौधा भेंट किया। आयोजन सचिव डॉ. नवीन जी. एच और कार्यक्रम समन्वयक डॉ. दीपेश्वर सिंह ने कार्यक्रम के उद्देश्य और रूपरेखा से प्रतिभागियों को अवगत कराया।
डीन ऑफ अकादमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू ने प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली और स्वास्थ्य पद्धतियों का महत्व बताते हुए कहा कि आयुर्वेद, योग, सिद्ध और यूनानी चिकित्सा न केवल शारीरिक स्वास्थ्य, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन पर भी ध्यान केंद्रित करती हैं। प्रो. अनिल शुक्ला ने योग और ध्यान के माध्यम से आत्मबोध और जीवन की समग्र दृष्टि पर प्रकाश डाला।
एसजीपीजीआई के मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. राजेश हर्षवर्धन ने आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि प्रो. नवीन के.वी. ने दीर्घकालिक सूजन और असंक्रामक रोगों में एडिपोसोपैथी और योग व प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से रोकथाम पर अपने विचार साझा किए।
विद्यार्थियों के लिए तकनीकी सत्रों में मोटापे, टाइप-2 मधुमेह और हृदय रोग एवं डिस्लिपिडिमिया के प्रबंधन में योग, प्राकृतिक चिकित्सा, उपवास और पोषण की भूमिका पर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। साथ ही प्राकृतिक पाक विधियों की जानकारी भी साझा की गई।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह और शॉल भेंट कर सम्मानित किया। समस्त कार्यक्रम में शिक्षक, शोधार्थी, गैर-शिक्षण कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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