कानपुर। जी.एस.वी.एम. मेडिकल कॉलेज, कानपुर में एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया (API) उत्तर प्रदेश चैप्टर का 42वां वार्षिक सम्मेलन – यूपी एपीकॉन 2025 जारी है, जिसके दूसरे दिन देशभर से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने चिकित्सा विज्ञान के उभरते क्षेत्रों पर विस्तृत विचार साझा किए।
दूसरे दिन के वैज्ञानिक सत्रों में रयूमेटोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी, पल्मोनरी मेडिसिन एवं हाइपरटेंशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर ज्ञानवर्धक व्याख्यान हुए।
प्रमुख वैज्ञानिक सत्रों की मुख्य बातें
• रयूमेटोलॉजी: डॉ. विकाश अग्रवाल (SGPGI लखनऊ) ने ऑटोइम्यून रोगों के आधुनिक प्रबंधन पर गहन चर्चा की। डॉ. अमित कुमार व डॉ. दुर्गा प्रसाद वर्मा ने रयूमेटॉयड आर्थराइटिस में लागू किए जा रहे नवीन दिशानिर्देशों का परिचय कराया।
• गैस्ट्रोएंटरोलॉजी: सत्र में डॉ. आर. के. धिमान (SGPGI लखनऊ) ने क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी पर अपने हालिया शोध साझा किए। वहीं, डॉ. अमित गोयल (SGPGI लखनऊ) ने MASLD (Metabolic Dysfunction Associated Steatotic Liver Disease) के निदान की नई तकनीकों पर प्रकाश डाला।
• नेफ्रोलॉजी: डॉ. अमित गुप्ता (लखनऊ) ने क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ के नवीन उपचार पर व्याख्यान दिया । इसके अलावा, डॉ. आनंद चेल्लप्पन (AIIMS नागपुर) ने डायबिटिक किडनी डिज़ीज़ में टेलर्ड थैरेपी की अवधारणा प्रस्तुत की।
• एंडोक्राइनोलॉजी: डॉ. मधुकर मित्तल और डॉ. माधव बंसल ने हाइपरथायरॉइडिज़्म एवं हाइपोथायरॉइडिज़्म इन प्रेग्नेंसी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी।
• पल्मोनरी मेडिसिन: इस सत्र में डॉ. आलोकनाथ (SGPGI लखनऊ) ने इंटरस्टिशियल लंग डिज़ीज़ (ILD) की फिजिशियन परिप्रेक्ष्य से समीक्षा की। डॉ. विष्णु शंकर शुक्ला एवं डॉ. विवेक सुमन ने ILDs के आधुनिक वर्गीकरण प्रस्तुत किए।
• अन्य सत्र: डॉ. पंकज के. अग्रवाल (मेरठ) ने PCOS के समग्र प्रबंधन पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
एम.पी. मेहरा ओरशन (Oration) में डॉ. आर.एच. सिंह (झांसी) ने चिकित्सा शिक्षा एवं क्लिनिकल रिसर्च में एकीकृत दृष्टिकोण पर प्रेरक विचार रखे।
हॉल-B में आयोजित ABPM (Ambulatory BP Monitoring) और Insulin वर्कशॉप्स में प्रतिभागियों को उच्च स्तरीय प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया। इन सत्रों का संचालन डॉ. साजिद अंसारी (लखनऊ), डॉ. अवधेश शर्मा (कानपुर), डॉ. सैबाल चक्रवर्ती (नोएडा), डॉ. ब्रजेश कुमार और डॉ. एम.पी. सिंह ने किया। वर्कशॉप्स में नई तकनीकों के साथ क्लिनिकल निर्णय लेने की दक्षता बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया।
पोस्टर प्रेजेंटेशन सत्रों में युवा शोधार्थियों ने नवीन अनुसंधानों की झलक प्रस्तुत की, जिसका मूल्यांकन वरिष्ठ निर्णायकों, जिनमें डॉ. महीक लांबा, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. ग्रंथ कुमार, तथा डॉ. बृजेश कुमार शामिल थे, ने किया।
सम्मेलन के समापन समारोह (Valedictory Function) में उत्कृष्ट प्रस्तुतियों और शोध पत्रों को सम्मानित किया गया। समारोह का संचालन डॉ. पारुल सिंह एवं डॉ. अमृता श्रीवास्तव ने किया।
आयोजन सचिव डॉ. एस. के. गौतम और आयोजन अध्यक्ष डॉ. ऋचा गिरी के मार्गदर्शन में यह सम्मेलन अत्यंत व्यवस्थित रूप से सफल रहा। प्रतिभागियों ने बताया कि दो दिवसीय इस वैज्ञानिक सम्मेलन में शोध, नैदानिक अनुभव, नवाचार और प्रौद्योगिकी का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
यूपी एपीकॉन 2025: आधुनिक चिकित्सा के नवीनतम आयामों पर गहन चर्चा





