फिरोजाबाद। नगर के सेठ छदामीलाल जैन मंदिर में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव में भगवान आदिनाथ के जीवन पर आधारित नाट्य रूपांतरण के दौरान बालक आदि कुमार का विवाह संस्कार संपन्न हुआ। नाट्य मंचन में दर्शाया गया कि एक नर्तकी का नृत्य देखकर आदि कुमार को वैराग्य हो जाता है और वे सांसारिक सुखों का त्याग कर वन की ओर प्रस्थान कर जाते हैं।
महोत्सव में आचार्य वसुनंदी गुरुदेव ससंघ के सान्निध्य में जिनभक्तों द्वारा प्रातः पीतवस्त्र और स्वर्ण मुकुट धारण कर पांडुक शिला पर विराजमान भगवान आदिनाथ का आलोक जैन शास्त्री के मंत्रोच्चार के साथ जिनाभिषेक एवं शांतिधारा की गई। विशेष पूजा-अर्चना के उपरांत आदिनाथ विधान भी संपन्न हुआ।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री वसुनंदी ने कहा कि भगवान आदिनाथ वर्तमान वैकल्पिक काल के प्रथम तीर्थंकर हैं और उनका उल्लेख ऋग्वेद तथा अथर्ववेद में भी मिलता है। उन्होंने बताया कि आदिनाथ के समय से पूर्व कल्पवृक्ष जनता की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करता था। उनका प्रमुख संदेश था—“कृषि करो या ऋषि बनो।”
मंच कलाकार अजय जैन द्वारा प्रस्तुत नाटक में अयोध्या के राजा नाभिराय और रानी मरुदेवी को बालक आदिकुमार का पालन-पोषण करते दिखाया गया। युवा होने पर आदिकुमार का विवाह कच्छ और महाकच्छ की दो बहनों—नंदा और सुनंदा—से हुआ। नंदा के गर्भ से जन्मे भरत आगे चलकर चक्रवर्ती सम्राट बने और उन्हीं के नाम पर देश का नाम ‘भारत’ पड़ा।
भगवान आदिनाथ (ऋषभनाथ) सौ पुत्रों तथा ब्राह्मी और सुंदरी नामक दो पुत्रियों के पिता बने। उन्होंने अपने पुत्रों को राज्य सौंपकर चैत (चैत्र) कृष्ण नवमी को सिद्धार्थ वन में दिगंबर दीक्षा ग्रहण की।
महोत्सव में सेठ महावीर जैन, डॉ. मनोज जैन शास्त्री, देवेंद्र कुमार जैन, विमलेश जैन, आदीश जैन, धीरेश जैन सिंघई, संजय जैन (पीआरओ), कुलदीप मित्तल, विनोद जैन मिलेनियम, मनीष जैन, आयुष जैन, ब्रजेश जैन, सुरेंद्र जैन, सुभाष जैन, दिनेश कुमार जैन, रामबाबू, अनिल कुमार जैन, अमित कुमार जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भगवान आदिनाथ वर्तमान समय के प्रथम तीर्थंकर हैं — वसुनंदी महाराज





