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लीगल क्लिनिक दिखा रहा है महिलाओं को अधिकारों की राह

कानपुर। पीड़ित और वंचित महिलाओं को निःशुल्क एवं त्वरित न्याय-सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित “लीगल क्लिनिक” मॉडल आज केवल एक सेवा नहीं, बल्कि मानवाधिकारों की रक्षा और समान न्याय तक पहुँच की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। अधिवक्ता एवं समाजसेवी दिशा अरोड़ा द्वारा संचालित यह पहल, जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में वन-स्टॉप सेंटर और अन्य संवेदनशील संस्थानों में प्रभावी रूप से लागू की जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर अधिवक्ता एवं समाजसेवी दिशा अरोड़ा ने कहा मानवाधिकार दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि न्याय, गरिमा, सुरक्षा और समान अवसर प्रत्येक व्यक्ति का मूलभूत अधिकार है और यही सिद्धांत इस लीगल क्लिनिक मॉडल की नींव बने हुए हैं।
घरेलू हिंसा, दहेज, परित्याग, लैंगिक अपराध, संपत्ति विवाद या पॉस्को जैसे संवेदनशील मामलों में फँसी महिलाएँ अक्सर जटिल कानूनी प्रक्रियाओं एफआईआर, अदालत, वकील, परामर्श को लेकर असमंजस और असहायता महसूस करती हैं। लीगल क्लिनिक इस अंतर को भरते हुए उन्हें सूचना, समाधान और न्याय के अधिकार से जोड़ने का वास्तविक माध्यम बनता है।
वन-स्टॉप सेंटर में सप्ताह के निर्धारित दिवसों पर आयोजित क्लिनिक बैठकों में दिशा अरोड़ा के नेतृत्व में अधिवक्ताओं की टीम द्वारा एफआईआर ड्राफ्टिंग एवं कम्प्लेंट प्रक्रिया, कानूनी परामर्श व मध्यस्थता, सोशल सपोर्ट सिस्टम से जोड़ने और आवश्यकता पड़ने पर अदालत में निःशुल्क प्रतिनिधित्व जैसी महत्वपूर्ण सेवाएँ महिलाओं को प्रदान करती हैं। इससे न सिर्फ उनका आर्थिक बोझ कम होता है, बल्कि न्याय-प्रक्रिया को समझने और अपने अधिकारों की रक्षा करने का आत्मविश्वास भी मिलता है।
अब तक इस मॉडल से 250 से अधिक महिलाओं को समयबद्ध राहत, पुनर्वास और गंभीर मामलों में तत्काल एफआईआर व मेडिकल सहायता प्राप्त हुई है। जो ‘सभी के लिए समान न्याय’ वाले मानवाधिकार दिवस के संदेश को धरातल पर उतारने का एक प्रेरक उदाहरण है।मानवाधिकारों की रक्षा के इस निरंतर और प्रभावी कार्य हेतु दिशा अरोड़ा को जिला प्रशासन कानपुर द्वारा औपचारिक रूप से सम्मानित भी किया गया है।
जिलाधिकारी के नेतृत्व में इस पहल को एक संस्थागत मॉडल में परिवर्तित किया जा रहा है, जिससे भविष्य में कानपुर के सभी ब्लॉकों, महिला आश्रय गृहों और शैक्षिक संस्थानों में भी “लीगल क्लिनिक दिवस” नियमित रूप से आयोजित किए जा सकें। यह मॉडल मिशन शक्ति की भावना – सुरक्षा, सम्मान, सशक्तिकरण और न्याय के साथ-साथ मानवाधिकार दिवस के मूल संदेश को भी जीवंत करता है: हर महिला को सुरक्षित, समर्थ और न्यायपूर्ण जीवन का अधिकार।

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