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पैरामैट्रिक एवं नॉन पैरामैट्रिक परीक्षण विषय पर दिया गया विशेष व्याख्यान 

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में सांख्यिकी विभाग की ओर से ‘ अनुसंधान पद्धति और सांख्यिकी तकनीकों का उपयोग – डेटा से निर्णय तक’ विषय पर आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला में पैरामैट्रिक एवं नॉन पैरामैट्रिक परीक्षण विषय पर विशेष व्याख्यान सत्र का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता के तौर पर डॉ. अमित कुमार मिश्रा, डॉ. सुभाष कुमार यादव एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. राहुल वार्ष्णेय उपस्थित रहे।
            डॉ. अमित कुमार मिश्रा ने पैरामीट्रिक परीक्षण विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि पैरामीट्रिक परीक्षण उन स्थितियों में उपयोग किए जाते हैं जहाँ डेटा सामान्य वितरण वाला और निरंतर होता है। इन परीक्षणों का उपयोग चिकित्सा, मार्केटिंग, पर्यावरण विज्ञान और कंप्यूटर विज्ञान जैसे विभिन्न क्षेत्रों में माध्य (means) एवं विचरण (variances) की तुलना के लिए किया जाता है। इनकी उच्च प्रभावशीलता (high power) के कारण ये क्लिनिकल ट्रायल्स (जैसे दवा की प्रभावशीलता), मार्केट रिसर्च , पर्यावरणीय निगरानी और जलवायु प्रवृत्तियों को समझने में अत्यंत उपयोगी होते हैं।
         डॉ. सुभाष कुमार यादव ने नॉन-पैरामीट्रिक परीक्षण विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि नॉन-पैरामीट्रिक परीक्षण तब उपयोग किए जाते हैं जब डेटा सामान्य रूप से वितरित न हो, नमूना आकार छोटा हो, या डेटा और्डिनल/रैंक्ड (जैसे स्टार रेटिंग, संतुष्टि स्तर) हो तथा आबादी के बारे में बहुत कम मान्यताएँ बनाई जा सकती हों। इनका उपयोग प्रमुख रूप से चिकित्सा अनुसंधान (मरीजों की प्रतिक्रियाएँ), मार्केट रिसर्च (पसंद की रैंकिंग), इंजीनियरिंग (सिस्टम की विश्वसनीयता), सामाजिक विज्ञान (ग्राहक व्यवहार व मार्केट अध्ययन) और वित्त (जोखिम मूल्यांकन) में किया जाता है।
          अंत में कार्यक्रम संयोजक डॉ. राहुल वार्ष्णेय ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समस्त कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शिक्षक, शोधार्थी एवं प्रतिभागी मौजूद रहे।

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