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बाबासाहेब भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय ने रचा प्रगति का नया इतिहास: कुलपति

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ ने वर्ष 2025 में शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, नवाचार, सामाजिक सरोकार एवं अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सशक्त पहचान स्थापित की है। यह उपलब्धियाँ विश्वविद्यालय की सकारात्मक सोच, कार्यकुशलता एवं सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं। वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय को कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल का नेतृत्व प्राप्त हुआ। उनके पदभार गृहण करने के पश्चात विश्वविद्यालय ने अल्प समय में ही अनेक महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किए। प्रो. मित्तल के दूरदर्शी मार्गदर्शन, नवाचारोन्मुख सोच और प्रभावी प्रशासनिक क्षमता नेघ् बीबीएयू को प्रगति की नई दिशा प्रदान की।
शैक्षणिक सत्र 2024-25 में बीबीएयू ने एनआईआरएफ की कुल रैंकिंग में 37वाँ स्थान प्राप्त कर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। इसके साथ ही विश्वविद्यालय को इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल की ओर से 3.5 स्टार रेटिंग प्राप्त हुई। इंडियन इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क में बीबीएयू ने 19वाँ स्थान तथा आउटलुक इंडिया की रैंकिंग में केंद्रीय विश्वविद्यालयों की श्रेणी में 8वाँ स्थान प्राप्त कर गौरव बढ़ाया।
इसी वर्ष सरकारी समन्वय एवं विश्वविद्यालय के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट कर विश्वविद्यालय के विकास कार्यों पर सार्थक चर्चा की। साथ ही मुख्यमंत्री युवा कॉन्क्लेव में कुलपति ने विद्यार्थियों को उद्यमिता एवं आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त किया। वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय परिसर में उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से निर्मित सावित्रीबाई फुले महिला छात्रावास, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से निर्मित ओबीसी पुरुष छात्रावास का लोकार्पण किया गया तथा बनने वाले नये आधुनिक व्याख्यान कक्ष परिसर का नींव रखीघ् गयी।
बीबीएयू को वर्ष 2025 में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ (एसजीपीजीआई) द्वारा ‘रक्तदाता चैंपियन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। साथ ही भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय द्वारा विश्वविद्यालय को ‘एनिमल हाउस’ के लिए मान्यता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय को ‘भारतीय अनुसंधान उत्कृष्टता साइटेशन अवॉर्ड’ प्राप्त हुआ तथा वाईब्रेंट इंडिया-2025 एवं पीएसईज एक्सपो में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
कुलपति प्रो. मित्तल द्वारा समाजोपयोगी शोध परियोजनाओं हेतु इंट्राम्यूरल ग्रांट की घोषणा की गई तथा ‘भारत बौद्धिक योजना’ के अंतर्गत कला, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान विषयों पर आधारित 21 पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। नवाचार, एनईपी-2020 एवं पर्यावरणीय पहल को ध्यान में रखते हुये प्रो. राज कुमार मित्तल के नेतृत्व में एनईपी -2020 आधारित एवं रोजगारोन्मुख 24 नए पाठ्यक्रम प्रारंभ किए गए। साथ ही ‘एक पेड़ माँ के नाम – 2.0 अभियान’ के अंतर्गत 2100 लोगों द्वारा एक साथ एक समय पर 2100 पौधे रोपित कर विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी शोधार्थियों के लिए एक पौधा लगाना, उसकी देखभाल करना एवं शोध प्रबंध के साथ उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है, जो कि कुलपति द्वारा शुरू की गयी एक अभिनव पहल है। साथ ही विश्वविद्यालय में ऐमीनेंट लेक्चर सीरीज, योग महाकुंभ-2025, राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020 उन्मुखीकरण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। साथ ही बीबीएयू के सहयोग से गोमती नदी के तट पर 60 दिवसीय ‘रिवर योग अभियान’ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय ने मैक्स अस्पताल, राजकीय तकमिल-उत-तिब विद्यालय एवं अस्पताल, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, गोमती टास्क फोर्स, सावित्रीबाई फुले इंस्टिट्यूट ऑफ वुमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट, एमएसएमई विभाग (उ.प्र.), रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, भारत सरकार, खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय तथा हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। साथ ही विश्वविद्यालय में पीएमदृविद्यालक्ष्मी योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को शैक्षणिक ऋण एवं ब्याज में छूट का लाभ प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त परिसर में स्वच्छता एवं वृक्षारोपण पखवाड़ा, विद्यार्थियों को टैबलेट वितरण जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए।
वर्ष 2025 में बीबीएयू के अनेक शिक्षकों ने विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में स्थान प्राप्त किया, जिनमें प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा, प्रो. राम नरेश भार्गव, प्रो. राम चंद्रा, डॉ. जयशंकर सिंह, डॉ. विमल चंद्र पांडेय, डॉ. आदित्य खम्परिया, डॉ. राजेश कुमार सिंह, प्रो. बी.सी. यादव, प्रो. बी.एस. भदौरिया, डॉ. अभिषेक वर्मा, दीपिका पी. सिंह, प्रो. देवेश कुमार, डॉ. मुकेश कुमार अवस्थी शामिल हैं। विश्वविद्यालय के प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा के मार्गदर्शन में बिलासपुर में बायोफर्टिलाइज़र उत्पादन इकाई की स्थापना की गई तथा उन्हें इंटरनेशनल इंपेक्ट अवार्ड, फैलो ऑफ अकेडमी ऑफ माइक्रोबायोलॉजिकल साइंसेज सहित कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। डॉ. रवि गुप्ता को गाय के गोबर और बैक्टीरिया का प्रयोग करके कम लागत में बनने वाले बायोप्लास्टिक के लिए, प्रो. पी. एस रजनीकांत को मधुमेह के घावों को भरने हेतु नयी नैनोफाइबर तकनीक हेतु , डॉ. पवन कुमार चौरसिया, डॉ. सुनील सिंह एवं डॉ. सतीश कुमार की टीम को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रोग पहचान चिकित्सा उपकरण हेतु, डॉ. अंशुल अग्रवाल को एकल चरण पाइप पंपिंग, डीसी माइक्रोग्रिड एवं शमन की नवीन विधि के लिए पेटेंट प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त डॉ. मोनू गुप्ता एवं प्रो. बी.सी. यादव द्वारा स्मार्ट ब्रीथ सेंसर तथा प्रो. संगीता सक्सेना, डॉ. युसुफ अख्तर एवं शोध छात्रा प्रियंका द्वारा आरएनए आधारित वैक्सीन विकसित की गयी। साथ ही डॉ. रवि शंकर वर्मा को हार्टिकल्चर के क्षेत्र में एच. बी. सिंह अवार्ड, डॉ. राजश्री को पूर्वांचल गौरव सम्मान प्राप्त हुआ समापन साथ ही प्रो. नरेंद्र कुमार को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की तकनीकी समिति का सदस्य मनोनीत किया गया। विश्वविद्यालय के ही डॉ. अर्पित वर्मा को फ्रांस के ऐम्स मार्सिले विश्वविद्यालय द्वारा पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप एवं मैनेजमेंट विभाग की छात्रा इशिता पांडेय को हेनली विश्वविद्यालय द्वारा दी जाने वाली प्रसिद्ध फेलिक्स स्कॉलरशिप प्राप्त हुईं।
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल के कुशल, दूरदर्शी एवं नवाचारपरक नेतृत्व में बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। वर्ष 2025 की ये उपलब्धियाँ विश्वविद्यालय को शिक्षा, अनुसंधान और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में एक राष्ट्रीय आदर्श के रूप में स्थापित करती हैं।

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