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यूजीसी कानून के विरोध में 1 फरवरी को भारत बंद

➯ 7 को हाथरस से दिल्ली तक पैदल मार्च
➯ पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री बोले, कानून वापस नहीं हुआ तो आंदोलन होगा तेज

हाथरस। यूजीसी कानून के विरोध में आंदोलन तेज होता नजर आ रहा है। इस्तीफा दे चुके बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने राष्ट्रीय सवर्ण परिषद के साथ संयुक्त रूप से हाथरस में प्रेस वार्ता कर 1 फरवरी को भारत बंद और 7 फरवरी को हाथरस से दिल्ली स्थित पीएमओ कार्यालय तक पैदल मार्च का एलान किया।

प्रेस वार्ता में अलंकार अग्निहोत्री ने सांसदों और विधायकों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि समय रहते इस कानून पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने कहा कि केवल कानून पर रोक लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे पूरी तरह वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने सवर्ण समाज से आह्वान किया कि वह इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग ले।

राष्ट्रीय सवर्ण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज धवरिया ने कहा कि यह कानून सवर्ण समाज के भविष्य पर सीधा प्रहार है और इससे समाज के बच्चों का भविष्य प्रभावित होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यूजीसी कानून वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।

इससे पहले जिले में पहुंचने पर राष्ट्रीय सवर्ण परिषद द्वारा पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग मौजूद रहे।

अलंकार अग्निहोत्री ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी कानून पर रोक लगाए जाने को लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद और विधायक कॉर्पोरेट कंपनियों के हित में काम कर रहे हैं और यह कानून देशहित के खिलाफ है। उन्होंने शहीद पार्क में शहीद भगत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया।

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का आभार है, जिसने इस कानून पर रोक लगाते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी रेगुलेशन के तहत सवर्ण समाज को पहले से ही अपराधी मानकर नियम बनाए गए थे, जिससे समाज के बच्चों का भविष्य संकट में पड़ सकता था।

उन्होंने कहा कि जब किसी भी जनप्रतिनिधि की ओर से इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, तब उन्हें लगा कि सिस्टम के अंदर रहकर काम करने वाला व्यक्ति अब बाहर आकर आवाज उठाए। उन्होंने भरोसा जताया कि जनता अब जाग चुकी है और यह कानून किसी भी कीमत पर लागू नहीं हो पाएगा। प्रेस वार्ता में राष्ट्रीय सवर्ण परिषद के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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