अहमदाबाद। दुनिया की पहली हवाई डाक सेवा ने 18 फरवरी 1911 को प्रयाग कुंभ के दौरान अपना इतिहास रचा। भारतीय डाक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और अहमदाबाद स्थित फॉरेन पोस्ट ऑफिस के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि उस दिन फ्रेंच पायलट मोनसियर हेनरी पिक्वेट ने हैवीलैंड एयरक्राफ्ट विमान में प्रयागराज से नैनी के लिए 6,500 पत्रों को लेकर उड़ान भरी। यह महज 13 मिनट की उड़ान थी, लेकिन इसने डाक सेवाओं के इतिहास में नया अध्याय जोड़ा। श्री यादव ने बताया कि उस समय प्रयागराज में लगभग एक लाख लोग इस ऐतिहासिक उड़ान को देखने के लिए एकत्र हुए थे। उड़ान प्रयागराज की यमुना नदी के किनारे से शुरू हुई और सेंट्रल जेल के पास नैनी जंक्शन के नजदीक संपन्न हुई। इस अवसर पर ‘यूपी एक्सीबिशन’ नामक कृषि एवं व्यापार मेला भी आयोजित था, जिसमें विमान का प्रदर्शन किया गया।
कर्नल वाई विंधाम ने पहली बार हवाई मार्ग से मेल बैग भेजने के लिए डाक अधिकारियों से संपर्क किया था। इस सेवा के लिए हवाई डाक पर छह आना का शुल्क रखा गया, और इससे प्राप्त आय को ऑक्सफोर्ड एवं कैंब्रिज हॉस्टल, इलाहाबाद को दान में दिया गया। इस उड़ान के दौरान भेजे गए पत्रों पर ‘पहली हवाई डाक’ और ‘उत्तर प्रदेश प्रदर्शनी, इलाहाबाद’ अंकित किया गया था। आज अहमदाबाद स्थित फॉरेन पोस्ट ऑफिस से हवाई मार्ग के जरिए प्रतिवर्ष 2 लाख से अधिक डाक और पार्सल विदेशों में भेजे जा रहे हैं। इनमें 200 से अधिक देशों के लिए प्रतिमाह 20 से 25 हजार डाक और पार्सल भेजे जाते हैं। देश के भीतर भी अहमदाबाद से प्रति माह 19 हजार से अधिक बैग, जिनका वजन लगभग 80,000 किलोग्राम है, हवाई मार्ग से वितरित किए जाते हैं।
पोस्टमास्टर जनरल श्री यादव ने बताया कि आज डिजिटल युग में संचार के अनेक माध्यम उपलब्ध हैं, लेकिन पत्रों की जीवंतता और महत्व अपनी अलग पहचान रखते हैं। पहली हवाई डाक सेवा ने न केवल पत्रों को पंख दिए, बल्कि लोगों के सपनों और उम्मीदों को भी उड़ान दी। यह सेवा वैश्वीकरण और आधुनिक डाक सेवाओं की नींव बनी, और भारत को दुनिया में इस ऐतिहासिक पहल का गौरव प्राप्त हुआ।










