श्याम बिहारी भार्गव: मथुरा। ‘दीक्षोत्सव माह–2026’ के अंतर्गत 24 फरवरी 2026 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में प्रथम डॉ. एस. अय्यप्पन स्मृति व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन माननीय कुलपति डॉ. अभिजित मित्र के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस प्रतिष्ठित व्याख्यान के मुख्य वक्ता डॉ. बसंत कुमार दास, निदेशक, आईसीएआर–केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर (कोलकाता) रहे। उन्होंने डॉ. एस. अय्यप्पन को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारत में अंतर्देशीय मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने में उनके दूरदर्शी नेतृत्व तथा ब्लू रिवोल्यूशन को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
“जीविका, पोषण सुरक्षा एवं सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु अंतर्देशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि” विषय पर अपने व्याख्यान में डॉ. दास ने ग्रामीण रोजगार सृजन, किसानों की आय में वृद्धि तथा सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन की उपलब्धता के माध्यम से पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में अंतर्देशीय मत्स्य पालन की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने वैज्ञानिक जलीय कृषि पद्धतियों, प्रजाति विविधीकरण, आनुवंशिक सुधार, जलाशय मत्स्य संवर्धन तथा एकीकृत कृषि प्रणालियों को उत्पादकता, सततता एवं समावेशी विकास के प्रमुख आधार स्तंभ बताया।
डॉ. दास ने युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को नवाचार, प्रौद्योगिकी आधारित समाधान तथा अंतःविषयक अनुसंधान को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, नीति-निर्माताओं एवं मत्स्य पालक समुदाय के बीच समन्वित सहयोग को सुदृढ़ करने का आह्वान किया, ताकि मत्स्य क्षेत्र को सशक्त, सतत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।
इस अवसर पर डुवासु और आईसीएआर–केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर के मध्य मत्स्य विज्ञान में अनुसंधान सहयोग एवं शैक्षणिक-तकनीकी उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए गए।
माननीय कुलपति डॉ. मित्र ने डॉ. एस. अय्यप्पन के मत्स्य विज्ञान एवं भारतीय अनुसंधान क्षेत्र में अमूल्य योगदान को स्मरण किया। मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता ने अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया, जबकि अनुसंधान निदेशक ने डॉ. अय्यप्पन के विशिष्ट जीवन एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उनका संक्षिप्त जीवन परिचय प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में प्राध्यापकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। यह स्मृति व्याख्यान न केवल मत्स्य विज्ञान के एक महान व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि था, बल्कि सतत जलीय कृषि विकास के लिए एक दूरदर्शी मार्गदर्शिका भी सिद्ध हुआ।





