श्याम बिहारी भार्गव: मथुरा। ब्रह्मांचल पर्वत की गोद में बसे बरसाना की रंगीली गलियों में नंदगांव के हुरियारों पर बरसाना की हुरियारिनों ने प्रेम से पगी लाठियां बरसाईं। सदियों पुरानी परंपरा के इस अनुपम दृश्य का साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु उमड़े। मान्यता है कि इस अद्भुत और अलौकिक लीला को देखने के लिए देवता भी लालायित रहते हैं। बुधवार की सांझ ढल रही थी। ब्रह्मांचल पर्वत के ऊपर मानो सूर्यदेव भी ठहर गए हों। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वे भी इस अद्भुत दृश्य को अपनी आंखों में संजो लेना चाहते हों। होली की ठिठोली, लाठियों की बोछार और रंगों की फुहार के बीच लठामार होली का अनुपम दृश्य साकार हो उठा।
हुरियारिनों की लाठियों के वार को नंदगांव के हुरियारे जतन से तैयार की गई ढाल पर सहते रहे। ढाल और लाठी के बीच चलता यह पारंपरिक संवाद किसी युद्ध जैसा नहीं, बल्कि प्रेम और रस की अनूठी अभिव्यक्ति प्रतीत हो रहा था। कान्हा की नगरी बरसाना में सदियों पुरानी यह लीला एक बार फिर जीवंत हो उठी। नंदगांव से हुरियारे राधारानी के गांव बरसाना पहुंचे। बरसाना की हुरियारिनों ने उन पर लाठियां बरसाईं और पूरा वातावरण अबीर-गुलाल से रंग उठा।
श्रीजी मंदिर से लेकर बरसाना की गलियां रंगों से सराबोर हो गईं। दिव्य और भव्य लठामार होली के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु सुबह से ही बरसाना में डेरा डाले रहे। हर ओर होली के रसिया गूंजते रहे और श्रद्धालु भक्ति व उल्लास में झूमते नजर आए। नंदगांव के हुरियारे सुबह नंदभवन में एकत्रित हुए। पद गाकर उन्होंने बरसाना चलने का निमंत्रण स्वीकार किया। इसके बाद श्रीकृष्ण स्वरूप पताका लेकर वे पद गाते, रंग-गुलाल उड़ाते और पारंपरिक वेशभूषा—धोती, बगलबंदी और पीतांबरी—धारण किए पैदल बरसाना धाम पहुंचे।
इस अलौकिक परंपरा के दौरान प्रशासन भी मुस्तैद दिखा। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार व्यवस्थाओं का जायजा लेते नजर आए। सुरक्षा और सुचारु आयोजन के बीच लठामार होली का पर्व श्रद्धा, परंपरा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।





