मथुरा। फरह ब्लॉक के ग्राम राहेपुरा जाट निवासी 42 वर्षीय विनीश टीबी संक्रमण से मुक्त होने के बाद अब टीबी चैंपियन के रूप में समुदाय में जागरूकता फैला रही हैं। उनका उद्देश्य है कि जिन कठिनाइयों और सामाजिक उपेक्षा का सामना उन्होंने किया, वैसी परेशानी किसी और को न झेलनी पड़े। विनीश ने बताया कि वर्ष 2015 में उन्हें टीबी हो गई थी। लंबे समय तक खांसी और बुखार रहने पर उन्होंने निजी अस्पताल में इलाज कराया, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण बाद में सरकारी अस्पताल का रुख किया। वहां चिकित्सकों ने उन्हें निःशुल्क उपचार और नियमित

दवा लेने के महत्व के बारे में समझाया। उन्होंने छह माह तक लगातार दवा लेकर बीमारी पर विजय पाई।
उपचार के दौरान सामाजिक दूरी और पारिवारिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अब वह स्वयं मरीजों की काउंसलिंग कर रही हैं और लोगों को समय पर जांच, नियमित दवा और पौष्टिक आहार लेने के लिए प्रेरित करती हैं। साथ ही यह भी बताती हैं कि टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़नी चाहिए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राधा वल्लभ ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार खांसी, बुखार, कमजोरी या वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत टीबी की जांच करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच और उपचार की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. संजीव यादव ने बताया कि टीबी एक संक्रामक रोग है, लेकिन इसका पूर्ण उपचार संभव है। उन्होंने मरीजों से बीमारी न छिपाने और सावधानी के तौर पर मास्क का प्रयोग करने की अपील की। जिला कार्यक्रम समन्वयक शिव कुमार के अनुसार वर्ष 2025 में 17,739, वर्ष 2024 में 18,083 और वर्ष 2023 में 17,296 मरीजों की पहचान की गई, जबकि वर्ष 2026 में अब तक 2,700 से अधिक मरीज चिन्हित किए जा चुके हैं।
जिला पीपीएम समन्वयक आलोक तिवारी ने बताया कि टीबी उन्मूलन के लिए जनजागरूकता बेहद जरूरी है। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जिला क्षय रोग विभाग और स्वयंसेवी संस्था मंडोना रूरल डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा मरीजों को पौष्टिक आहार से संबंधित व्यंजन पुस्तिका भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर हो सकें।





