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“रेमंड द कम्पलीट मैन”: विजयपत सिंघानिया एक रोचक कहानी थे..

राजीव रंजन नाग: नई दिल्ली। भारतीय विज्ञापन के इतिहास में सबसे मशहूर और सदाबहार टैगलाइनों में से एक है ‘Raymond: The Complete Man’। उदारीकरण के बाद के भारत में सोची गई यह टैगलाइन पुरुषों के कपड़ों के उन विज्ञापनों से अलग पहचान बनाती थी, जो सिर्फ मर्दाना छवि दिखाते थे।

‘Raymond Man’ संवेदनशील, ज़िम्मेदार और भावुक था। वह अपने छोटे बच्चे के साथ खेलता था, अपने बचपन के शिक्षक का सम्मान करता था और किसी बच्चे को अपने शादी के सूट पर फूल लगाने देता था। जैसे-जैसे केबल टीवी भारतीय घरों में पहुँचा और ज़्यादा से ज़्यादा महिलाएँ काम करने लगीं, मूल्यों में ज़बरदस्त बदलाव आया; अब ज़िम्मेदारियों को आपस में बाँटना ज़रूरी हो गया था। इसी माहौल में ‘Raymond Man’ ने आम लोगों का दिल जीत लिया, जिससे यह विज्ञापन की दुनिया की एक बड़ी सफलता की कहानी बन गई और भारत की सबसे लंबे समय तक चलने वाली टैगलाइनों में शामिल हो गई।

पुरुषों के फैशन की दुनिया में सबसे भरोसेमंद नामों में से एक बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले विजयपत सिंघानिया, जो रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन और पद्म भूषण से सम्मानित थे, का मुंबई में 87 साल की उम्र में निधन हो गया। वे एक बेहतरीन एविएटर (विमान चालक) भी थे और हॉट एयर बैलून से सबसे ज़्यादा ऊंचाई तक पहुँचने का विश्व रिकॉर्ड उनके नाम था। इस टेक्सटाइल दिग्गज को 2006 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। सिंघानिया ने 2000 तक दो दशकों तक चेयरमैन के तौर पर रेमंड का नेतृत्व किया। उन्होंने कंपनी की कमान अपने बेटे गौतम सिंघानिया को सौंप दी और कंपनी में अपनी 37% हिस्सेदारी भी उन्हें ट्रांसफर कर दी।

उनके बेटे और रेमंड ग्रुप के मौजूदा चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर गौतम सिंघानिया ने X पर लिखा, “गहरे दुख और शोक के साथ, हम पद्म भूषण डॉ. विजयपत कैलाशपत सिंघानिया के निधन की सूचना दे रहे हैं। वे एक दूरदर्शी नेता, परोपकारी और प्रेरणादायक व्यक्तित्व थे, जिनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन और प्रेरणा करती रहेगी।” विजयपत सिंघानिया का अंतिम संस्कार रविवार को चंदनवाड़ी में कर दिया गया। उनके परिवार में उनकी पत्नी आशादेवी सिंघानिया और बच्चे मधुपति सिंघानिया, शेफाली रुइया और गौतम सिंघानिया हैं।

4 अक्टूबर 1938 को जन्मे सिंघानिया ने 1980 में रेमंड ग्रुप के चेयरमैन का पद संभाला था। उन्होंने कंपनी को एक बड़ी ताकत बनाया। विजयपत और गौतम के बीच 2015 से कई वर्षों तक कानूनी विवाद चलता रहा, लेकिन 2024 में उनके बीच सुलह हो गई।

उद्योगपति विजयपत सिंघानिया ने कॉर्पोरेट जगत में एक खास पहचान बनाई। 1980 से चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर रेमंड में उनकी लीडरशिप—जो 1991 के आर्थिक उदारीकरण से भी एक दशक पहले शुरू हुई थी—ने यह सुनिश्चित किया कि यह टेक्सटाइल ब्रांड कई पुराने ब्रांडों के विपरीत, मुश्किलों का सामना करने में सक्षम रहे।

साहसिक और एविएशन के शौकीन सिंघानिया के लिए आसमान ही सीमा था; वे ऐसे बिरले कॉर्पोरेट लीडर थे जो बोर्डरूम से बाहर भी जोखिम भरे कारनामे करने से नहीं हिचकिचाते थे। दोनों ही क्षेत्रों—व्यापार और रोमांच—में उनकी उपलब्धियों ने उन्हें खूब सराहना दिलाई। उन्हें भारत का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म भूषण और साथ ही तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

नवंबर 2005 में, उस समय 67 वर्ष के सिंघानिया ने एक हॉट एयर बैलून में लगभग 69,000 फीट की ऊंचाई तक पहुँचकर विश्व रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले, 1988 में उन्होंने एक माइक्रोलाइट विमान में अकेले लंदन से नई दिल्ली तक 23 दिनों में उड़ान भरकर ‘स्पीड-ओवर-टाइम एंड्योरेंस रिकॉर्ड’ बनाया था।

1994 में, भारतीय वायु सेना ने उन्हें 5,000 घंटे से अधिक उड़ान अनुभव के सम्मान में ‘मानद एयर कमोडोर’ बनाया, जबकि 2006 में उन्हें मुंबई का ‘शेरिफ’ नियुक्त किया गया। व्यापार के क्षेत्र में सिंघानिया ने रेमंड का विस्तार सिंथेटिक कपड़ों, डेनिम, स्टील, इंडस्ट्रियल फाइलों और सीमेंट तक किया, जिससे एक विविध औद्योगिक समूह का निर्माण हुआ।

मार्च 2007 में, डॉ. सिंघानिया को भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद की गवर्निंग काउंसिल का चेयरमैन नियुक्त किया गया, जहाँ वे 2012 तक रहे। वर्ष 2000 में उन्होंने रेमंड ग्रुप की कमान अपने बेटे गौतम सिंघानिया को सौंप दी, लेकिन वे सार्वजनिक जीवन में सक्रिय बने रहे। हालांकि, हाल के वर्षों में सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति कम हो गई थी। कुछ साल पहले विजयपत और गौतम सिंघानिया के बीच कानूनी विवाद हुआ था, लेकिन बाद में उन्होंने आपसी सहमति से उन मुद्दों को सुलझा लिया।

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