श्याम बिहारी भार्गव: मथुरा। ब्रिटिश गुलामी के खिलाफ भारतीय जनता के एकजुट प्रतिरोध और स्वराज का प्रेरक बने जालियांवाला बाग हत्याकांड की 107वीं वर्षगांठ पर अखिल भारतीय सांप्रदायिकता विरोधी समिति की स्थानीय इकाई द्वारा चौक बाजार स्थित गांधी पार्क में गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा दीपदान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अ.भा. सांप्रदायिकता विरोधी समिति के अध्यक्ष कामरेड शिवदत्त चतुर्वेदी ने कहा कि देश के स्वाधीनता आंदोलन में जालियांवाला बाग कांड ब्रिटिश राज की निर्ममता का ऐसा उदाहरण था, जिसने प्रत्येक भारतीय के मन में आजादी की भावना को नया आवेग प्रदान किया। महात्मा गांधी के आह्वान पर शुरू हुए असहयोग आंदोलन के क्रम में अमृतसर के जालियांवाला बाग में एक विशाल सभा हो रही थी, जिसमें हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदाय के लोग बड़ी संख्या में मौजूद थे और स्वराज की मांग कर रहे थे। तभी जनरल डायर के नेतृत्व में सैनिकों ने बिना किसी उकसावे के भीषण गोलीबारी कर दी, जिसमें सैकड़ों लोग शहीद हुए और हजारों घायल हो गए। इस घटना से पूरे देश में उथल-पुथल मच गई। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपना ‘सर’ का खिताब लौटा दिया और देशभर में ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध की लहर फैल गई।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश धनगर ने जालियांवाला बाग कांड को एक दिल दहला देने वाली घटना बताते हुए कहा कि इसकी तुलना हिटलर के गैस चैंबरों से की जा सकती है, जहां नाजी शासन अपने विरोधियों की सामूहिक हत्या करता था। उन्होंने कहा कि उस समय अंग्रेजी शासन स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे की मांग को भारतीयों के खून में डुबो देने पर आमादा था। आज भी राजनीतिक अधिनायकवाद और कॉर्पोरेट पूंजी का गठजोड़ सांप्रदायिक नफरत फैलाकर लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और संविधान को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। कार्यक्रम का संचालन जिला कांग्रेस महामंत्री वैद्य मनोज गौड़ ने किया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने जालियांवाला बाग कांड की 107वीं वर्षगांठ पर देश की आजादी, अखंडता और लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लिया। उपस्थित जनों में महेश चौबे, अर्पित जादौन, विपुल पाठक, आदित्य तिवारी, सुशील कुमार सागर एडवोकेट, रूपेश धनगर, आशीष अग्रवाल, पूरन सिंह, दीपक वर्मा (पूर्व सभासद), अनिल खरे, अनवर फारुकी, सुरेश शर्मा, आकाश शर्मा, योगेश आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।





