रायबरेली। विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर राही ब्लॉक के अंतर्गत मनेहरू गांव में सामुदायिक चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य विभाग, एम्स रायबरेली द्वारा जन जागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों का आयोजन कर ग्रामीणों को वेक्टर जनित रोगों के प्रति जागरूक किया गया। संस्थान की कार्यकारी निदेशक डॉ. अमिता जैन ने बताया कि वर्ष 2000 के बाद से वैश्विक स्तर पर लगभग 2.3 बिलियन मलेरिया मामलों और 14 मिलियन मौतों को रोका जा चुका है, जो दर्शाता है कि सही रणनीति और जनभागीदारी से मलेरिया उन्मूलन संभव है। विभागाध्यक्ष डॉ. भोला नाथ ने कहा कि मलेरिया-प्रभावित देशों की संख्या 108 से घटकर लगभग 80 रह गई है और 47 देश मलेरिया मुक्त हो चुके हैं। उन्होंने स्वच्छता, जल जमाव की रोकथाम और स्रोत नियंत्रण को सबसे प्रभावी उपाय बताया।
डॉ. सौरभ पॉल ने कहा कि समय पर जांच, उचित उपचार और मच्छरदानी के उपयोग से मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। कार्यक्रम के अंतर्गत एमबीबीएस छात्रों द्वारा नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसने ग्रामीणों को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वास्थ्य शिविर में डॉ. स्वलेहा, डॉ. मानस, डॉ. नंदिनी, डॉ. सुजन एवं डॉ. शशांक की टीम द्वारा जांच एवं स्क्रीनिंग की गई। इस दौरान मलेरिया, डेंगू और टाइफाइड की जांच भी की गई और जरूरतमंदों को निःशुल्क दवाइयां वितरित की गईं।
साथ ही हाउसकीपिंग टीम द्वारा गांव में स्वच्छता अभियान चलाकर जल जमाव रोकने और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने का कार्य किया गया। ग्रामीणों को टेमेफॉस के उपयोग सहित मच्छरों से बचाव के उपाय जैसे पानी जमा न होने देना, साफ-सफाई बनाए रखना और मच्छरदानी का प्रयोग करने की जानकारी दी गई। इस अवसर पर ग्रामीणों ने स्वास्थ्य शिविर में भाग लेकर निःशुल्क जांच कराई और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श प्राप्त किया। कार्यक्रम में डेंगू एवं लिम्फेटिक फाइलेरियासिस जैसे रोगों के कारण, लक्षण, उपचार और बचाव के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. भोला नाथ एवं डॉ. सौरभ पॉल के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें एमबीबीएस छात्रों, जूनियर रेजिडेंट्स एवं हाउसकीपिंग कर्मियों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम का उद्देश्य समुदाय को वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के प्रति जागरूक करना और स्वस्थ वातावरण को बढ़ावा देना था।





