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विज्ञान, गणित और दर्शन की जननी है संस्कृत भाषा

ऊंचाहार, रायबरेली। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के तत्वावधान में संचालित ‘गृहे-गृहे संस्कृतं’ योजना के अंतर्गत सरल संस्कृत भाषा शिक्षण कक्षा का समापन बचपन स्टडी ग्रुप विद्यालय, अरखा में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रशिक्षु जानवी द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण से हुआ। विद्यालय के प्रबंधक अजय कुमार शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया। इसके बाद प्रशिक्षिका सीमा शुक्ला के निर्देशन में बच्चों ने संस्थान गीत और स्वागत गीत प्रस्तुत किया।

प्रतिभा प्रदर्शन सत्र में विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुति से सभी को प्रभावित किया। रुपेंद्र ने संख्यागीत, रिदा ने श्लोक गायन, अंशुमान ने संस्कृत गीत और सूरज ने संस्कृत में अपना परिचय प्रस्तुत किया। बच्चों के शुद्ध उच्चारण और आत्मविश्वास की उपस्थित जनों ने सराहना की।

प्रशिक्षिका सीमा शुक्ला ने अतिथियों का परिचय देते हुए कक्षा की प्रास्ताविकी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इस योजना का उद्देश्य संस्कृत भाषा को जन-जन तक पहुंचाना है। साथ ही अभिभावकों और ग्रामवासियों से संस्कृत संभाषण को बढ़ावा देने और योजना में सहयोग करने की अपील की। समापन सत्र में मुख्य अतिथि ने बच्चों के कम समय में उत्कृष्ट प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए प्रशिक्षिका के प्रयासों को सराहा। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल पूजा-पाठ की भाषा नहीं, बल्कि विज्ञान, गणित और दर्शन की जननी है। बच्चों को प्रारंभ से ही संस्कृत से जोड़ना सराहनीय कदम है और इससे हमारी संस्कृति और अधिक समृद्ध होगी। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागी बच्चों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। अभिभावकों ने संस्थान की इस पहल को उपयोगी बताते हुए इसकी प्रशंसा की।

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