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निष्कपट भक्ति, विनम्रता और समर्पण से मिलती है भगवान की कृपा

फिरोजाबाद। ग्राम शाहपुर में आयोजित पितृमोक्षार्थ श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं एवं श्रीमद्भागवत के अमृतमय उपदेशों का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। कथा व्यास रसराज दास महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के 16,108 दिव्य विवाहों तथा स्यमन्तक मणि के पावन प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान की प्रत्येक लीला लोककल्याण और धर्म की स्थापना के लिए होती है। उन्होंने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान अपने भक्त के प्रेम के भूखे हैं, वैभव के नहीं। निष्कपट भक्ति, विनम्रता और समर्पण ही भगवान की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम साधन है।

उन्होंने कहा कि जब सुदामा अपने मित्र भगवान श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे तो भगवान ने उनका अत्यंत प्रेम और सम्मान के साथ स्वागत किया। यह प्रसंग सच्ची मित्रता, भक्ति और प्रेम का अनुपम उदाहरण है। कथा के दौरान कलियुग के राजवंशों, राजा परीक्षित की परम मुक्ति तथा भगवन्नाम की महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया गया। रसराज दास महाराज ने कहा कि कलियुग में भगवान के पवित्र नाम का संकीर्तन ही मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल और श्रेष्ठ साधन है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से श्रीमद्भागवत का श्रवण एवं भगवान के नाम का स्मरण करने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे मानव जीवन सफल और सार्थक बनता है। कथा में यजमान दिलीप यादव, इंजीनियर गजेन्द्र यादव तथा समस्त ग्रामवासी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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