रायबरेली। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जनपद में संचालित 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान, समय पर उपचार और जनजागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। अभियान के तहत जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से सक्रिय सहभागिता की अपील की है। सांसद के.एल. शर्मा ने कहा कि टीबी मुक्त जनपद का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब प्रत्येक नागरिक इस अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, बुखार, लगातार वजन कम होना, रात में अत्यधिक पसीना आना या बलगम के साथ खून आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत निकटतम सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर टीबी की जांच कराएं।
उन्होंने कहा कि टीबी का समय पर पता लगने और नियमित उपचार से यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है। साथ ही लोगों से टीबी से जुड़े भ्रम और सामाजिक कलंक को समाप्त करने तथा ऐसे लक्षण वाले लोगों को जांच कराने के लिए प्रेरित करने की अपील की। उन्होंने बताया कि सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की जांच, दवाएं और उपचार पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चन्द्रा ने बताया कि 100 दिवसीय अभियान के तहत हाई-रिस्क आबादी की सक्रिय स्क्रीनिंग, घर-घर संपर्क, निक्षय शिविरों का आयोजन तथा संदिग्ध मरीजों की त्वरित जांच कर उन्हें उपचार से जोड़ने का कार्य प्राथमिकता पर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य संभावित मरीजों की समय रहते पहचान कर संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि टीबी के लक्षण दिखाई देने पर बिना किसी संकोच के जांच कराएं और उपचार बीच में न छोड़ें।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनुपम सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान अब तक 30,157 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इनमें से 2,857 संभावित मरीजों की जांच कराई गई, जबकि 1,993 नए टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ दिया गया है। इसके अलावा 864 ऐसे टीबी मरीज भी चिन्हित किए गए हैं, जिनमें कोई स्पष्ट लक्षण नहीं थे। अभियान के तहत अब तक 392 निक्षय शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। वहीं, एआई आधारित हैंडहेल्ड डिजिटल एक्स-रे मशीन की मदद से 1,457 संभावित टीबी मरीजों की पहचान की गई है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से टीबी की शीघ्र पहचान संभव हो रही है, जिससे मरीजों का उपचार समय पर शुरू किया जा रहा है। पूरा उपचार लेने से मरीज पूर्णतः स्वस्थ हो सकता है और संक्रमण को अन्य लोगों तक फैलने से भी रोका जा सकता है।




