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जिलाधिकारी ने 12 परिजनों को सौंपे विधिक संरक्षकता प्रमाणपत्र

कानपुर। ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, बौद्धिक दिव्यांगता एवं बहु-दिव्यांगता से ग्रसित अनेक व्यक्ति 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद भी अपने जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय स्वयं लेने में सक्षम नहीं होते। ऐसे दिव्यांगजनों के अधिकारों एवं भविष्य की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय लोकल लेवल समिति की बैठक आयोजित की गई।
बैठक में विधिक संरक्षक नियुक्त किए जाने संबंधी 12 प्रस्तावों पर सुनवाई एवं विचार-विमर्श के उपरांत पात्र परिजनों को विधिक संरक्षकता (लीगल गार्जियनशिप) प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
जिलाधिकारी ने बताया कि भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल ट्रस्ट अधिनियम, 1999 के तहत ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, बौद्धिक दिव्यांगता एवं बहु-दिव्यांगता से ग्रसित ऐसे वयस्क व्यक्तियों के लिए विधिक संरक्षक (लीगल गार्जियन) नियुक्त करने का प्रावधान है, जो अपनी मानसिक स्थिति के कारण बैंकिंग, उपचार, संपत्ति, शिक्षा अथवा अन्य महत्वपूर्ण मामलों में स्वयं निर्णय लेने में सक्षम नहीं होते। ऐसे मामलों में माता-पिता, भाई-बहन अथवा परिवार का कोई निकट संबंधी निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनका विधिक संरक्षक बन सकता है।
जिलाधिकारी ने बताया कि विधिक संरक्षकता केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। संरक्षक नियुक्त किए जाने से पूर्व प्रशासन द्वारा विस्तृत सत्यापन कराया जाता है। संबंधित टीम आवेदक के घर जाकर यह सुनिश्चित करती है कि प्रस्तावित संरक्षक का कोई व्यक्तिगत स्वार्थ न हो तथा वह वास्तव में दिव्यांगजन के हित, सुरक्षा एवं देखभाल के प्रति समर्पित हो। विस्तृत जांच और जिला स्तरीय लोकल लेवल समिति की सुनवाई के बाद ही विधिक संरक्षकता प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।
उन्होंने बताया कि संरक्षक नियुक्त होने के बाद संबंधित व्यक्ति को दिव्यांगजन के सर्वाेत्तम हित में उपचार, देखभाल, बैंकिंग, संपत्ति तथा अन्य आवश्यक मामलों में वैधानिक निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त हो जाता है। इससे दिव्यांगजन के अधिकारों एवं भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद में लगभग 2,000 ऐसे दिव्यांगजन होने का अनुमान है, जो इस व्यवस्था का लाभ प्राप्त करने के पात्र हो सकते हैं। अब तक लगभग 200 से 250 पात्र लाभार्थियों को इस योजना से जोड़ा जा चुका है। प्रशासन का प्रयास है कि सभी पात्र परिवारों तक इस व्यवस्था की जानकारी पहुंचे, ताकि कोई भी जरूरतमंद परिवार केवल जानकारी के अभाव में इस महत्वपूर्ण सुविधा से वंचित न रह जाए।
उन्होंने पात्र परिवारों से अपील की कि यदि उनके परिवार में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का कोई सदस्य ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, बौद्धिक दिव्यांगता अथवा बहु-दिव्यांगता से ग्रसित है, तो वे नेशनल ट्रस्ट की इस व्यवस्था का लाभ उठाने के लिए आवेदन अवश्य करें।
बैठक में जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी विनय उत्तम, समिति के सदस्य हिर्देश सिंह तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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