जलभराव के कारण लोग अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर

भोगनीपुर, कानपुर देहात। तहसील, थाना और न्यायालय जैसी प्रशासनिक सुविधाओं से लैस भोगनीपुर विधानसभा का यह क्षेत्र इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच यहाँ की जमीनी हकीकत अत्यंत दयनीय बनी हुई है। मानसून की बारिश शुरू होते ही पूरा क्षेत्र आधे से अधिक जलमग्न हो चुका है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है।
यह समस्या भोगनीपुर की ‘नई बस्ती’ इलाके की है, जहाँ जलभराव की स्थिति विकराल रूप ले चुकी है। स्थानीय निवासी शालू खान, फातमा बेगम और शीलू समेत दर्जनों लोगों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि सड़कों पर कई फीट पानी भरा हुआ है। जलभराव के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और बुजुर्गों का घर से निकलना दूभर हो गया है। स्थिति इतनी बदतर है कि लोग अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कानपुर देहात में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार और उनके जनप्रतिनिधि होने के बावजूद इस गंभीर समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले सत्ताधारी दल के प्रतिनिधि अब संकट के समय जनता को उनके हाल पर छोड़कर गायब हैं।
भोगनीपुर की इस दुर्दशा पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस की प्रदेश महासचिव (सोशल मीडिया) निहारिका सिंह ने तस्वीरें साझा करते हुए सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा, ‘‘भोगनीपुर विधानसभा क्षेत्र की पहचान सर्वविदित है, लेकिन आज यहाँ की स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है। नई बस्ती की तस्वीरें बयां कर रही हैं कि बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सब परेशान हैं। भाजपा सरकार के प्रतिनिधि इस ओर ध्यान देने को कतई तैयार नहीं हैं। जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है।’’
क्षेत्रीय जनता ने जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि जल निकासी की तत्काल व्यवस्था की जाए, ताकि महामारी फैलने की आशंका को रोका जा सके और लोगों को इस नारकीय जीवन से निजात मिल सके।

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